ISSN (O): 3107-9679Frequency: QuarterlyLanguages: English, Hindi and other languagesDOI Prefix: 10.70650
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Volume 1, Issue 2 (October – December 2025)

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Volume 1Issue 2October – December 2025 202521 articles

Table of contents

Articles in this issue

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01

छपरा शहर में शहरीकरण की प्रक्रियाएं और सामाजिक परिवर्तनः एक भूगोलिक अध्ययन

डॉ0 विकाश कुमार

छपरा शहर में तेज़ी से विकसित होते शहरी विस्तार ने सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक संरचनाओं में व्यापक परिवर्तन पैदा किए हैं। बढ़ती जनसंख्या, प्रवास, नए आवासीय क्षेत्रों का निर्माण और वाणिज्यिक गतिविधियों में वृद्धि ने शहर के आकार, भूमि उपयोग और जीवनशैली को पुनर्गठित…

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02

The Role of Artificial Intelligence in News Curation and Production: A Comparative Analysis

Prof. Ravi Prakash

Artificial Intelligence (AI) has become a defining force in contemporary journalism, reshaping how news is curated, produced, and consumed. As digital information ecosystems expand, news organisations increasingly rely on algorithms and automated systems to p…

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04

एक दृष्टि मे साकेतानंदक कथा साहित्य

चन्देश्वर राम

साहित्य समाजक सापेक्ष सृजित होइत अछि। मानवक जीवन-यापनक पद्धतिमे समयानुकूलता जेना-जेना परिवर्त्तन होइत छैक, तहिना साहित्यमे सेहो परिवर्त्तन होइत छैक। रचनाकार एहि परविर्त्तन केँ कथ्य, शिल्प आ प्रस्तुतिक माध्यमे अपन रचनामे अभिव्यक्त करैत अछि। एहि परविर्त्तनक अभि…

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05

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रभावः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन

महेन्द्र प्रताप सिंह

भारत में, खासतौर से ग्रामीण इलाकों में, पारंपरिक ईंधन के इस्तेमाल के कारण बहुत-सी महिलाओं के लिए रोजाना खाना बनाने का काम उनके स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा रहा है। भारत में वर्ष 2014 तक लगभग 10 करोड़ परिवारों को स्वच्छ एलपीजी ईंधन नहीं मिलता था और वे रसोई ईंधन…

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07

भारतीय ज्ञान परम्परा और योगः ऋजुयोग के विषेष सन्दर्भ में

डॉ0 प्रमिता मिश्रा

भारतीय ज्ञान परम्परा मानव जीवन के सर्वांगीण विकास का समृद्ध और प्राचीन आधार प्रस्तुत करती है। यह परम्परा वेद, उपनिषद, दर्शन, योग और आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच समन्वय स्थापित करती है। योग इस ज्ञान परम्परा का एक महत्वपूर्ण अंग…

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09

स्वतंत्रता के बाद नव भारत में मजदूर और महिलाओं का योगदान

डॉ० स्वर्ण मणि

स्वतंत्रता के पश्चात नव भारत के निर्माण में मजदूर वर्ग और महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुआयामी रहा है। औद्योगिकीकरण, आधारभूत संरचना के विकास तथा आर्थिक प्रगति में मजदूर वर्ग ने अपने परिश्रम, संगठन और आंदोलनों के माध्यम से निर्णायक भूमिका निभाई। श्र…

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10

चित्रा मृद्गल का रचना संसार

जिज्ञांषु पाठक

चित्रा जी की लेखनी को उपन्यास, कहानी तथा लघुकथा इन तीनों विधाओं पर सफलतापूर्वक अधिकार प्राप्त है। अपने लेखन को महिलापन से बचाते हुए उन्होंने अपने उपन्यास तथा कहानियों में वर्गीय सीमाओं का अतिक्रमण कर निम्न वर्ग के पक्षधर रचनाकार के रूप में अपनी पहचान बनाई है।…

Proposed DOI · registration pending10.70650/rpimj.2025v1i200010
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11

Work-Related Anxiety in Public and Private Organisations

Ramesh Kumar

Work-related anxiety has emerged as a critical psychological concern affecting employees across both public and private organisations. Rapid technological advancements, global crises, organisat ional r estructuring, and incr easing perf ormance pr essur es ha…

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12

A Study on Stress and Satisfaction Levels of Bank Employees in Bhagalpur

Nilesh Kumar Mandal

The present study investigates the stress and job satisfaction levels of bank employees in Bhagalpur, India, focusing on both public and private sector banks. With increasing competition, technological advancements, and higher customer expectations, bank empl…

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14

परम्परागत तथा दूरस्थ शिक्षा के द्वारा प्रशिक्षित बी.एड. प्रशिक्षणार्थियों की शिक्षण दक्षता, समायोजन क्षमता के प्रति अभिवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन

रीता यादव

शोध पत्र का उद्देश्य परम्परागत तथा दूरस्थ शिक्षा के द्वारा प्रशिक्षित बी.एड. प्रशिक्षुओं की शिक्षण दक्षता, समायोजन के प्रति अभिवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन करना है। शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम भावी शिक्षकों को अच्छा एवं प्रभावशाली बनाने का एक अच्छा ढंग है जिससे…

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16

आस्था, उम्र और मानसिक जड़ताः विश्वास-स्थायित्व का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

डॉ. संजय कुमार

मानसिक जड़ता (Cognitive Rigidity) और विश्वास-स्थायित्व (Cognitive Rigidity) मानव चिंतन के ऐसे पक्ष हैं, जो व्यक्ति की आयु, मस्तिष्कीय विकास, सामाजिक अनुभव तथा सांस्कृतिक परिवेश से गहराई से जुड़े होते हैं। यह लेख विभिन्न आयु-समूहों में मानसिक जड़ता के विकासात्मक…

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17

भारत में आर्थिक समृद्धि एवं रोजगार के अवसरः एक समीक्षात्मक अध्ययन

डॉ0 अरूण प्रसाद अमन

भारत युवाओं का देश है, भारत मे 15-64 वर्ष की 67.8 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। इसलिए भारत को जनांकिकीय लाभांश की स्थिति प्राप्त है। भारत के जी.डी.पी. ने कृषि क्षेत्र का योगदान सबसे कम 18 प्रतिशत है। किंतु भारत की 49 प्रतिशत जनसंख्या आज भी कृषि क्षेत्र पर न…

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18

पश्चिमी कोशी मैदान में पर्यावरणीय समस्याः एक अध्ययन

डॉ० अमित कुमार सिंह

पश्चिमी कोशी मैदान (उत्तर बिहार का एक प्रमुख भाग, मुख्यतः पश्चिमी कोशी नहर कमान क्षेत्र) पर्यावरणीय संकटों का केन्द्र है। यह क्षेत्र कोशी नदी की बाढ़, नहर निर्माण से उत्पन्न जल-जमाव, गाद जमा होने, मिट्टी की उर्वरता ह्रास और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से जूझ र…

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20

शिक्षा का अधिकार अधिनियम और सामाजिक समावेशनः बेगूसराय में हितधारकों की दृष्टि से मूल्यांकन

चंदन कुमार

प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य बिहार के बेगूसराय जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) की स्थिति का मूल्यांकन करना है। यह अध्ययन 25ः आरक्षित सीटों के माध्यम से निजी स्कूलों में वंचित बच्चों के दाखिले, उनके समावेशन के…

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21

Women Empowerment in India: A Study of Socio-Cultural Necessity and Developmental Impact

Dr. Anuradha Kumari

Women empowerment is a dynamic and multidimensional process aimed at enabling women to gain autonomy, exercise equal rights, participate meaningfully in decision- making, and realize their full potential across social, economic, political, and personal sphere…

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