Article summary
Abstract
भारतीय ज्ञान परम्परा मानव जीवन के सर्वांगीण विकास का समृद्ध और प्राचीन आधार प्रस्तुत करती है। यह परम्परा वेद, उपनिषद, दर्शन, योग और आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच समन्वय स्थापित करती है। योग इस ज्ञान परम्परा का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसका उद्देश्य शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक संतुलन की प्राप्ति है। प्रस्तुत अध्ययन में भारतीय ज्ञान परम्परा की पृष्ठभूमि में योग की अवधारणा का विश्लेषण किया गया है तथा विशेष रूप से ऋजुयोग के सिद्धांतों और व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डाला गया है। ऋजुयोग सरलता, सहजता और नैतिक जीवन मूल्यों पर आधारित योग पद्धति है, जो आधुनिक जीवन की जटिलताओं के बीच व्यक्ति को आत्मानुशासन, मानसिक शांति और सकारात्मक जीवन दृष्टि प्रदान करती है। यह योग न केवल आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि सामाजिक और नैतिक चेतना के विकास में भी सहायक है। अध्ययन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि ऋजुयोग भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल तत्वों को आधुनिक संदर्भ में किस प्रकार प्रभावी रूप से प्रस्तुत करता है।
