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Abstract
उत्तराखंड भारत का एक सीमावर्ती हिमालयी राज्य है, जिसका सामरिक महत्त्व स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से
निरंतर बढ़ता गया है। उत्तर में चीन (तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र) तथा पूर्व में नेपाल से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ,
हिमालयी दर्रे, गंगा एवं यमुना जैसी महत्त्वपूर्ण नदियों का उद्गम, ऊँचाई वाले संवेदनशील क्षेत्र तथा उत्तर भारत
की सुरक्षा में इसकी केंद्रीय भूमिका इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाती है। 1962 के भारत
चीन युद्ध के पश्चात उत्तराखंड की सामरिक उपयोगिता और अधिक स्पष्ट हुई, जिसके परिणामस्वरूप सीमा
सड़क संगठन (ठत्व्), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (प्ज्ठच्), अग्रिम सैन्य चौकियों, वायुसेना अड्डों तथा सीमा
अवसंरचना के विकास पर विशेष बल दिया गया। वर्तमान समय में उत्तराखंड केवल सीमा सुरक्षा का क्षेत्र नहीं,
बल्कि भारत की हिमालयी सुरक्षा नीति, जल सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, रक्षा लॉजिस्टिक्स, धार्मिक कूटनीति तथा
इंडो-पैसिफिक रणनीतिक दृष्टिकोण का भी महत्त्वपूर्ण अंग बन चुका है। प्रस्तुत शोध-लेख में स्वतंत्रता के बाद
उत्तराखंड के सामरिक महत्त्व के ऐतिहासिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा में इसकी भूमिका, वर्तमान चुनौतियों तथा
भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है।
