भारतीय संस्कृति एवं विरासत
डॉ. पी.एम. भुमरे, विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, एस.एम.बी.पी.के. महाविद्यालय, शंकरनगर, बिलोली, नांदेड़
DOI: 10.70650/rpimj.2026v2i100004
DOI URL: https://doi.org/10.70650/rpimj.2026v2i100004
Issue: Vol. 2 ★ Issue 1 ★ January-March 2026
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प्रारंभिक अनुच्छेद:

भारतवर्ष और उसकी सांस्कृतिक महिमा विश्वविख्यात रही है। भारतीय संस्कृति का आशय है-सहानुभूति, विशालता, बिना स्थिर रहे ज्ञान का मार्ग ढूँढ़ते-ढूँढ़ते आगे बढ़ना तथा संसार में जो कुछ सत्यं शिवं और सुन्दरं दिखाई दे, उसे प्राप्त करके बढ़ती जाने वाली संस्कृति आदि। भारतीय संस्कृति संग्रह करने वाली है, सबको पास लाने वाली है तथा संकुचितता से दूरी बनाये रखने वाली है। भारतीय संस्कृति में त्याग, संयम, वैराग्य, सेवा, प्रेम, ज्ञान तथा विवेक आदि समाहित हैं।