आधुनिक संदर्भों में भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) के माध्यम से नवाचार के अवसर
डॉ0 बबीता खाती, असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी
DOI: 10.70650/rpimj.2026v2i100002
DOI URL: https://doi.org/10.70650/rpimj.2026v2i100002
Issue: Vol. 2 ★ Issue 1 ★ January-March 2026
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सारांश:

भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System- IKS) शिक्षा, कृषि, प्रौद्योगिकी और सामाजिक संगठन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का मूलाधार है, जिसने सहस्राब्दियों तक मानव जीवन को दिशा दी है। वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, गणित, खगोलशास्त्र, वास्तुशास्त्र, साहित्य और कला जैसी विविध परंपराएँ इसमें सम्मिलित हैं। आज के समय में जब विज्ञान और तकनीक तीव्र गति से आगे बढ़ रहे हैं, भारतीय ज्ञान प्रणाली ;प्ज्ञैद्ध परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का कार्य करती है और एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। स्वास्थ्य क्षेत्र में योग और आयुर्वेद आधुनिक चिकित्सा के पूरक के रूप में उभर रहे हैं। कृषि में पारंपरिक बीज संरक्षण और जैविक खेती सतत विकास के लिए उपयोगी सिद्ध हो रही है। शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली ;प्ज्ञैद्ध आधारित पाठ्यक्रम और अनुसंधान पद्धतियाँ विद्यार्थियों को समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। प्रौद्योगिकी और गणित में भारतीय सूत्रों का प्रयोग आधुनिक कंप्यूटिंग और अनुसंधान को नई दिशा दे सकता है। सामाजिक संगठन में समुदाय आधारित निर्णय प्रणाली और सहजीवन की परंपरा नवाचार की संभावनाएँ प्रस्तुत करती है। फिर भी, प्ज्ञै के सामने वैज्ञानिक प्रमाणिकता, वैश्विक मान्यता और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। इन चुनौतियों का समाधान आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान प्रणाली ;प्ज्ञैद्ध के समन्वय, विशेष अनुसंधान संस्थानों की स्थापना तथा नीति निर्माण में भारतीय ज्ञान प्रणाली प्ज्ञै के समावेश से संभव है। अंततः, भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए नवाचार का आधार भी है। यदि इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुनः परिभाषित कर आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए, तो यह भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

मुख्य शब्द: भारतीय ज्ञान प्रणाली IKS, नवाचार, योग और आयुर्वेद, शिक्षा और अनुसंधान, पारंपरिक.