भावनात्मक बुद्धिमत्ता और जीवन-गुणवत्ता के बीच संबंध
डॉ0 विश्वजीत भारतीय, शिक्षक मनोविज्ञान, पी. एम. श्री बसंत 10$2 उच्च विद्यालय, इतिम्हा कर्मा, ब्लॉक नासरीगंज, जिला -रोहतास, बिहार.
DOI: 10.70650/rpimj.2026v2i1000012
DOI URL: https://doi.org/10.70650/rpimj.2026v2i1000012
Issue: Vol. 2 ★ Issue 1 ★ January-March 2026
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सारांश:

भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence -EI) मानव व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य तथा समग्र कल्याण को प्रभावित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं में से एक के रूप में उभरी है। दूसरी ओर, जीवन-गुणवत्ता किसी व्यक्ति द्वारा अपने जीवन की स्थिति के प्रति की गई धारणा को दर्शाती है, जो उस सांस्कृ तिक और मूल्य प्रणाली के संदर्भ में होती है जिसमें वह रहता है, तथा उसके लक्ष्यों, अपेक्षाओं, मानकों और चिंताओं से संबंधित होती है। पिछले कुछ दशकों में मनोविज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के क्षेत्रों में शोधकर्ताओं ने भावनात्मक बुद्धिमत्ता और जीवन-गुणवत्ता के बीच संबंध को समझने में विशेष रुचि दिखाई है। यह शोध-पत्र भावनात्मक बुद्धिमत्ता और जीवन-गुणवत्ता की वैचारिक आधारभूमि का अध्ययन करता है, विभिन्न सैद्धांतिक दृ ष्टिकोणों का विश्लेषण करता है, अनुभवजन्य अध्ययनों की समीक्षा करता है तथा इनके बीच संबंध की प्रकृति और मजबूती को स्पष्ट करता है। यह अध्ययन यह भी दर्शाता है कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता किस प्रकार मनोवैज्ञानिक कल्याण, सामाजिक संबंधों, शारीरिक स्वास्थ्य और जीवन-संतोष को बढ़ाने में सहायक होती है। पूर्ववर्ती अध्ययनों के निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता और जीवन-गुणवत्ता के बीच एक सकारात्मक एवं महत्वपूर्ण संबंध विद्यमान है। उच्च भावनात्मक बुद्धिमत्ता वाले व्यक्ति बेहतर भावनात्मक नियंत्रण, कम तनाव, मजबूत अंतर-व्यक्तिगत संबंध तथा अधिक जीवन-संतोष का अनुभव करते हैं। शोध-पत्र का निष्कर्ष यह है कि शिक्षा, प्रशिक्षण एवं परामर्श के माध्यम से भावनात्मक बुद्धिमत्ता का विकास विभिन्न आयु-समूहों और सामाजिक संदर्भों में जीवन-गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।.

मुख्य शब्द: भावनात्मक बुद्धिमत्ता, जीवन-गुणवत्ता, मनोवैज्ञानिक कल्याण, जीवन-संतोष, मानसिक स्वास्थ्य।