शोध पत्र का उद्देश्य परम्परागत तथा दूरस्थ शिक्षा के द्वारा प्रशिक्षित बी.एड. प्रशिक्षुओं की शिक्षण दक्षता, समायोजन के प्रति अभिवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन करना है। शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम भावी शिक्षकों को अच्छा एवं प्रभावशाली बनाने का एक अच्छा ढंग है जिससे भावी पीढ़ी को इस प्रकार शिक्षित किया जा सके कि वह अच्छे एवं उत्पादक नागरिक बना सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य भावी शिक्षकों की शिक्षण के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति, सकारात्मक आत्म प्रत्यय एवं मानव जीवन में संबंधित मूल्य को विकसित करके उनके व्यवहार में इस प्रकार परिवर्तन लाना होता है, जिससे वह राष्ट्रीय शिक्षा के उद्देश्यों की पूर्ति करने में सफल हो सकें। चूँकि शिक्षा का उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना होता है और उसका केन्द्र बिन्दु भावी शिक्षक ही होते हैं। अतः बालक के विकास उन्नति तथा सफलता काशोध अध्ययन हेतु प्रतिदर्श के रूप में 200 बी.एडप्रशिक्षुओं का चयन आकस्मिक प्रतिदर्श द्वारा किया गया है। बी.एड. प्रशिक्षुओं की शिक्षण दक्षता के मापन हेतु ‘बी.के. पासी एवं एम.एस ललिथा’ द्वारा निर्मित ‘जनरल टीचिंग कॉम्पीटेन्सी स्केल’ का प्रयोग किया गया। प्राप्त प्रदत्तों के विश्लेषण के सन्दर्भ में मध्यमान, मध्यांक, मानक विचलन, क्रान्तिक अनुपात तथा टी परीक्षण का प्रयोग किया गया। प्रदत्तों के विश्लेषणोपरान्त यह पाया गया कि महाविद्यालयों के बी.एड. प्रशिक्षुओं की शिक्षण दक्षता एवं समायोजन मंे (0.01) स्तर पर सार्थक अन्तर है अर्थात् महाविद्यालय के बी.एड. प्रशिक्षुओं में शिक्षण दक्षता अध्कि होती है परन्तु उनकी शिक्षण दक्षता में कोई सार्थक अन्तर नहीं होता है। इसी प्रकार उच्च एवं निम्न तथा औसत एवं निम्न शिक्षण दक्षता वाले बी.एड. प्रशिक्षुओं की समायोजन में कोई सार्थक अन्तर नहीं होता है लेकिन उच्च एवं औसत शिक्षण दक्षता वाले बी.एड. प्रशिक्षुओं की समायोजन में (0.05) सार्थक अन्तर दृष्टिगोचर होता है।
मुख्य शब्द: परम्परागत एवं दूरस्थ शिक्षा, प्रशिक्षित बी.एड. प्रशिक्षु, शिक्षण दक्षता, समायोजन एवं अभिवृत्ति।.