स्वतंत्रता के पश्चात नव भारत के निर्माण में मजदूर वर्ग और महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुआयामी रहा है। औद्योगिकीकरण, आधारभूत संरचना के विकास तथा आर्थिक प्रगति में मजदूर वर्ग ने अपने परिश्रम, संगठन और आंदोलनों के माध्यम से निर्णायक भूमिका निभाई। श्रम आंदोलनों के परिणामस्वरूप श्रम कानूनों, न्यूनतम वेतन, कार्यस्थल सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार संभव हो सके, जिससे मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार आया। दूसरी ओर, महिलाओं ने शिक्षा, उद्यमिता, सामाजिक जागरूकता और नीति निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाकर राष्ट्रनिर्माण को नई दिशा प्रदान की। शिक्षित होकर शिक्षिका, उद्यमी एवं विभिन्न पेशेवर भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी ने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी और लैंगिक समानता को बल दिया। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण ने आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक परिवर्तन को गति दी। मजदूरों और महिलाओं के संयुक्त प्रयासों से सामाजिक समरसता, आर्थिक स्थिरता और समावेशी विकास को मजबूती मिली। इस प्रकार, स्वतंत्रता के बाद मजदूर और महिलाओं का योगदान नव भारत के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास का सशक्त आधार सिद्ध हुआ है।
मुख्य शब्द: नव भारत, मजदूर वर्ग, महिला सशक्तिकरण, औद्योगिकीकरण, श्रम आंदोलन, सामाजिक परिवर्तन, राष्ट्रीय विकास।.