मानवाधिकार की उपयोगिता
डॉ. भावना कमाने, प्रभारी-प्राचार्य, बाबू पढरीराव कृदत शासकीय महाविद्यालय, सिलौटी, धमतरी (छ.ग.)
DOI: 10.70650/rpimj.2025v1i200008
DOI URL: https://doi.org/10.70650/rpimj.2025v1i200008
Issue: Vol. 1 ★ Issue 2 ★ October - December 2025
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आरंभिक अनुच्छेद:

व्यक्ति को एक मानव होने के नाते स्वयमेव मानव के अधिकारों की प्राप्ति हो जाती है। मानव को समुचित रूप से जीवन जीने तथा जीवन को विकसित करने के लिए खुली छूट है, परन्तु इसमें एक शर्त है कि जीवन जीने का तथा उसको विकसित करने का तरीका नैतिक होना अनिवार्य है। अनैतिका का मार्ग अवैध माना जाता हैं मानवाधिकार शब्द युग्म शब्द है मानव$अधिकार मानवाधिकार। मानवाधिकार का शाब्दिक अर्थ है- मानव से सम्बन्धित नैसर्गिक अधिकार। इसका विश्लेषण इस प्रकार है- मानव के अस्तित्व, गरिमा एवं उसके समग्र विकास से सम्बन्धित ही मानवाधिकार है। मानवाधिकार का अर्थ है मानव को कुछ करने या रखने की स्वतंत्रता। अधिकार विधि द्वारा मान्यता प्राप्त और संरक्षित होते हैं। मानवाधिकार का एक अन्य अर्थ इस प्रकार है- अर्थात् मानव को प्राप्त कुछ अधिकार जो उसके अस्तित्व एवं विकास के लिए अपरिहार्य हैं।