प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रभावः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
महेन्द्र प्रताप सिंह, शोधार्थी समाजशास्त्र, अकबरपुर डिग्री कॉलेज अकबरपुर, कानपुर देहात
डॉ0 रश्मि पाण्डेय, असिस्टेण्ट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, अकबरपुर डिग्री कॉलेज, अकबरपुर, कानपुर देहात
DOI: 10.70650/rpimj.2025v1i200005
DOI URL: https://doi.org/10.70650/rpimj.2025v1i200005
Issue: Vol. 1 ★ Issue 2 ★ October - December 2025
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सारांश:

भारत में, खासतौर से ग्रामीण इलाकों में, पारंपरिक ईंधन के इस्तेमाल के कारण बहुत-सी महिलाओं के लिए रोजाना खाना बनाने का काम उनके स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा रहा है। भारत में वर्ष 2014 तक लगभग 10 करोड़ परिवारों को स्वच्छ एलपीजी ईंधन नहीं मिलता था और वे रसोई ईंधन के रूप में जलाने की लकड़ी, उपले, कृषि अपशिष्ट और चारकोल आदि जैसे पारम्परिक बायोमास ईंधनों का इस्तेमाल करते थे। इन ईधनों से निकलने वाले जहरीले धुएँ में जहरीले पदार्थ और हानिकारक रसायन होते हैं जो आंखों और फेफड़ों के लिए हानिकारक होते हैं जिससे निमोनिया और लंबे समय तक चलने वाली फेफड़ों की बीमारियां और सांस की बीमारी होती है। धुएँ में कैंसरकारी तत्व भी होते हैं जो फेफड़ों के कैंसर का कारण बनते हैं। रसोई के इस हानिकारक धुएँ से महिलाओं के अलावा बच्चों को भी परेशानी होती है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के वैश्विक पर्यावरण स्वास्थ्य के प्रोफेसर स्वर्गीय प्रोफेसर किर्क स्मिथ के अनुसार इस हानिकारक धुएँ को अंदर लेना प्रति घंटे 400 सिगरेट पीने के बराबर है। महिलाओं और बच्चों को भी दूर-दूराज और सुनसान जगहों पर ईधन की लकड़ी इकट्ठा करने के लिए जाना पड़ता था जो न केवल एक कठिन काम था अपितु व्यक्तिगत सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिम भरा था। भारतीय महिलाओं को इस नीरस काम से बचाने और उनके जीवन को स्वस्थ बनाने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) शुरू की गई थी। स्वच्छ रसोई ईधन उपलब्ध करवा कर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) शुरू की गई थी ताकि उन्हें धुएँ से भरी रसोई में अपने स्वास्थ्य से समझौता न करना पड़े। दिनांक 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पीएमयूवाई योजना शुरू की थी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को शुरू में 5 करोड़ बीपीएल परिवारों की वयस्क महिलाओं को बगैर अग्रिम राशि के एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य दिया गया था। इस योजना के लिए 8000 करोड़ रुपए आबंटित किए गए थे। बाद में बजट से 4800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान करके योजना के लक्ष्य को संशोधित करके 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन कर दिया गया।