शिक्षा का अधिकार अधिनियम और सामाजिक समावेशनः बेगूसराय में हितधारकों की दृष्टि से मूल्यांकन
चंदन कुमार, शोधार्थी (जेआरएफ), स्नातकोत्तर, राजनीति विज्ञान विभाग, बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा।

DOI: 10.70650/rpimj.2025v1i2000020
DOI URL: https://doi.org/10.70650/rpimj.2025v1i2000020
Issue: Vol. 1 ★ Issue 2 ★ October - December 2025
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सारांश:

प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य बिहार के बेगूसराय जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) की स्थिति का मूल्यांकन करना है। यह अध्ययन 25ः आरक्षित सीटों के माध्यम से निजी स्कूलों में वंचित बच्चों के दाखिले, उनके समावेशन के अनुभवों, और हितधारकों (अभिभावक, शिक्षक, स्कूल प्रबंधन) के दृष्टिकोण पर केंद्रित है। शोध के अनुसार, नामांकन में वृद्धि हुई है, लेकिन ‘सामाजिक समावेश’ अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTI) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21। के तहत 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करता है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य निजी स्कूलों में 25ः आरक्षण (धारा 12(1)(ब) के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा में शामिल करना है। बेगूसराय, बिहार में इस अधिनियम के कार्यान्वयन का मूल्यांकन हितधारकों (अभिभावक, शिक्षक, स्कूल प्रशासन, प्रशासनिक अधिकारी) की दृष्टि से मिश्रित परिणाम प्रस्तुत करता है।

मुख्य शब्द: समावेशन, शिक्षक, चुनौती, प्रशासन, परिणाम।