माखनलाल चतुर्वेदी का हिंदी काव्य में राष्ट्रीयता संबंधी योगदान अद्वितीय और प्रेरणादायी है। उनके साहित्य ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय संस्कृति, एकता, स्वाभिमान और देशभक्ति को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। उनकी रचनाएँ सरल भाषा, प्रभावी प्रतीक और भावनात्मक गहराई से परिपूर्ण थीं, जिन्होंने जनमानस को अत्यधिक प्रेरित किया। चतुर्वेदी ने कविता के माध्यम से न सिर्फ राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना एवं सामाजिक एकता का संचार भी किया। उनका साहित्यिक उद्देश्य राष्ट्रीयता की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करने, स्वाधीनता आंदोलन के आदर्शों को जीवित रखने और नयी पीढ़ी में देशभक्ति जागृत करने का रहा। ऐतिहासिक संदर्भ में भी उनका योगदान साहित्य और समाज के बीच सेतु का कार्य करता है। उनकी कविताएँ न केवल भावुकता का प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव, राजनीतिक जागरूकता और राष्ट्रीयता के नए आयामों का भी संकेत देती हैं। उनकी शैली में जो सहजता, प्रतीकात्मकता और उत्साह दिखाई देता है, वह आधुनिक संदर्भ में भी प्रासंगिक है। कुल मिलाकर, माखनलाल चतुर्वेदी का कार्य हिंदी साहित्य में राष्ट्रीयता को स्थायी ऊर्जा और दिशा प्रदान करता है।
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